मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

"अनिश्चितकालीन हड़ताल करने हेतु अति महत्व्पूर्ण संदेश"


प्रिय साथियों,
जैसा कि आप सभी को पता है कि संघ द्वारा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की 9 सूत्रीय मांगो को लेकर इस वर्ष शासन से -
1.7 बार पत्राचार
2. 21 दिसम्बर को 51 जिलों में रैली और ज्ञापन
3.29 जनवरी को भोपाल में प्रदर्शन
4. पीएस एमडी मंत्रियों से 2 से 3 बार मुलाकात
5.15 तारीख को पुनः एमडी से विस्तृत चर्चा
6. 2 बार एमडी पीएस को संघ का प्रतिनिधिमण्डल कमेटी में शामिल करने हेतु अनुरोध पत्र लिखा गया
हमारी मांगों का निराकरण होना तो दूर शासन द्वारा आज तक एक भी जवाब तक देना हमें उचित नही समझा इसलिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना हमारी आवशयकता और समय की मांग है,संघ द्वारा 29 फ़रवरी की दिनांक संविदा बनाम शासन के संघर्ष की शुरुआत के लिए निर्धारित की गयी है जिसकी वजह ये है कि----
1.फ़रवरी की समस्त कार्यक्रम की रिपोर्टिंग ठप्प
2.फाइनेंसियल क्लोजिंग ठप्प
3.जाँच दवा वितरण स्क्रीनिंग ठप्प
4.समस्त हितग्राही मूलक योजनाओं का भौतिक और वित्तीय लक्ष्य पूरा करने का ये पूरे वर्ष का संवेदनशील समय है
5.सारे सॉफ्टवेयर ठप्प
सरकार को जवाब नही देते बनेगा अगर जब ये सारे काम एक साथ 2 माह के बंद होंगे
अगर ये डेट हमने मार्च पहले वीक में रखी तो फ़रवरी की सारी रिपोर्टिंग बैकलॉग फाइनेंसियल क्लोजिंग हम कर चुके होंगे जिससे सरकार को हमारी ज्यादा गरज नही रहेगी
इसलिए 29 फ़रवरी की डेट फाइनल करने का संघ निर्णय लेने का मन बना चुका है ।
अनिश्चितकालीन हड़ताल 3 दिन चलेगी या 30 दिन ये कोई नहीं बता सकता इसलिए तैयारी लम्बी लड़ाई लड़ने के हिसाब से होनी चाहिए अनिश्चितकालीन हड़ताल में सिर्फ और सिर्फ धैर्य ही एक ऐसा साथी है जो कठिन से कठिन मार्ग को आसान करके मंजिल तक पहुचाएगी
इसलिए सभी साथियों जिला अधयक्षों से अनुरोध है कि कल दोपहर 12 बजे तक अपने जिलों की स्थिति संभागीय अध्यक्षों को और संभागीय अध्यक्ष मुझे और प्रांतीय सचिव रमेश तोमर जी को 1 बजे तक हर हाल में फ़ोन पर अवगत करावें कि कितने जिले अनिश्चितकालीन हड़ताल 29 फ़रवरी से करने के लिए पूरे 1 माह तक हड़ताल करने की मानसिकता के साथ समर्पण और तन मन धन,निडरता के साथ तैयार हैं हड़ताल के लिए ।
ये फीडबैक जिलों से फ़ोन पर लिया जावे न कि व्हाट्स एप्प पर
सैलरी आने की और फ़रवरी की रिपोर्टिंग और क्लोजिंग की चिंता करने वालों को मैं ये कहना चाहता हूँ कि हमारा विभाग हमारे भविष्य की क्लोजिंग में ध्यान दे रहा है भलाई में नहीं इसलिए विभाग की क्लोजिंग नही अपनी ओपनिंग की चिंता की जाये और समय पर वेतन सब दिन ट्रेजरी में समय से आने लगे हड़ताल इसलिए भी हो रही है ।
कल दोपहर 1:30 बजे तक संभागीय अध्यक्षों से 51 जिलों के फीडबैक की प्रत्याशा में.....
सौरभ सिंह चौहान
प्रदेश अध्यक्ष
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ् म0प्र0

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

​निःशक्तजनो को दिव्यांग न कहे ​

माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी 
7 रेस कोर्स रोड नई देल्ही 
110011 ph- 911123012321 
fax- 911123016857 
 
   माननीय प्रधानमंत्री मंत्री जी आप देश के पहले प्रधानमंत्री मंत्री है जिन्होंने हर वर्ग के हितो के बारे में गम्भीरता से विचार किया आप ने विकलागो के बारे में भी सोचा आप के मन में विचार आया की जब इश्वर मनुष्य में कुछ कमी रखता है तो उसको पूरा करने के लिए कुछ विशेस शक्ति दिव्यता देता है माननीय प्रधानमंत्री जी विकलागो में कोई दीव्यता या इस्वरिय अलोकिक शक्ति नहीं होती है विकलाग भी अन्य मनुष्यों की तरह ही हैं और उनमें कोई विशेष शक्तियां आदि नहीं होती। उन्हें “दिव्यांग” कहना ठीक उसी तरह है जैसे गांधी जी ने एक नया शब्द “हरिजन” गढ़ा था। एक वर्ग के लोगों को नाम मिल गया कि वे भगवान् के जन हैं और हकीकत में उन्हें छूने तक से गुरेज़ होता रहा।इस लिए विकलागो को दिव्याग कहा जाना उचित नहीं होगा और आप ने अपने मन की बात को सार्वजानिक करते हुए विकलागो को नया नाम दिव्याग दे दिया परन्तु माननीय प्रधानमंत्री जी विकलाग समाज को नए नाम की नहीं दया की नहीं समान अधिकार समान अवसर सरक्षण पूण भागीदारी शिक्षा रोजकर की जरूरत है विकलाग समाज को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए दिव्याग कहना जरुरी नहीं है माननीय प्रधानमंत्री जी सेन्सस 2001 से 2011 के बीच किये गए सर्वेक्षण में विकलांगजनो की संख्या 22.4% निकाली गयी । 2001 में यह संख्या 2.19 करोड़ थी जो की 2011 तक बढ़कर 2.68 करोड़ पहुँच गयी जिसमे 1.85 करोड़ पुरुष व 1.18 करोड़ महिलाये शामिल है विश्व बैंक द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में पाया गया है भारत में 7 करोड़ से अधिक (कुल जनसंख्या का 6%) विकलांग होने का अनुमान है. कि भारत में विकलांग व्यक्ति अपेक्षाकृत अधिक गरीब हैं, उनके अनपढ़ और स्कूल नहीं जाने की संभावना अधिक होती है, उनके रोजगार के दर कम होते हैं और उन्हें सामाज में कलंक के रूप में माना जाता है. भारत में केवल 2% विकलांग स्कूल जाते हैं और उनमें से केवल 1% को लाभप्रद रोजगार मिलता है. Delhi High Court ने 2009 में निर्देश दिए थे कि प्रत्येक विद्यालय में 2 ऐसे शिक्षको की नियुक्ति होगी जो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान करेंगे इस उपलक्ष में अभी तक कोई भी कार्यवाही नही की गयी  अतः प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि वो सभी विद्यालयों में विशेष शिक्षको की स्थाई नियुक्ति करवाये साथ ही रोज़गार में अवसर प्रदान करें 2011 के बाद से भारत सरकार के पास विकलांगो की जनसँख्या का न ही कोई भी सुनिश्चित आंकड़ा है और न ही इनकी मांगों को सुना जा रहा है ऐसे में सिर्फ शब्दों के फेरबदल से क्या बदलाव आएगा । आज भी विकलांग भाइयों को पेंशन के लिए विकलांगता प्रमाणपत्र के लिए कार्यालयों व् अस्पतालों के चक्कर लगाना पड़ता है हमारा प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि वो शब्द के फ़ेरबदल की जगह विकलांगजनो को समान अवसर , अधिकार संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी के साथ साथ विकलांगजनो के लिए शिक्षा, रोजगार, रक्षा , सम्मान एवं बाधामुक्त वातावरण प्रदान करें जिससे हमारे विकलांगजन भाई एक सुखी संपन्न व सम्मानित जीवन यापन कर सके।
धन्यवाद 
 भवदीय  
रजनीश तिवारी 

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

किरनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम केशा में शुक्रवार की शाम करीब 4 बजे एक पिता ने अपने दो नि:शक्त बच्चो पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया

किरनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम केशा में शुक्रवार की शाम करीब 4 बजे एक पिता ने अपने दो नि:शक्त बच्चो पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। इस घटना से पुत्र सुमित की मौके पर ही मौत हो गई। बालाघाट. किरनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम केशा में शुक्रवार की शाम करीब 4 बजे एक पिता ने अपने दो नि:शक्त बच्चो पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। इस घटना से पुत्र सुमित की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि पुत्री दिपिका गंभीर रुप से घायल हो गई। घटना के बाद पिता ने भी अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही किरनापुर पुलिस मौके पर पहुंची। घायल पुत्री को अस्पताल भिजवाया। वहीं पंचनामा कार्रवाई कर पिता-पुत्र के शव को पीएम के लिए किरनापुर मुख्यालय लाया। किरनापुर थाना प्रभारी नासिर फारुखी के अनुसार केशा निवासी राजेन्द्र पिता हरीचंद पटले 40 वर्ष दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रुप में वन विभाग के माटे सर्किल में चौकीदार है। राजेन्द्र के तीन संतान हैं, जिसमें सबसे बड़ी बेटी दिपिका (12), सुमित (07) और एक तीन वर्ष बेटा शामिल हैं। इसमें दिपिका और सुमित नि:शक्त हैं। जो चल-फिर नहीं सकते हैं। मामूली बात पर किया वार शुक्रवार को राजेन्द्र ने अपनी पत्नी आशा को धान की मिसाई करने के लिए खलियान को साफ करने कहा था। लेकिन आशा बकरियों के लिए चारा लाने चली थी। जब आशा घर लौटी तो राजेन्द्र को दिपिका और सुमित पर कुल्हाड़ी से वार करते हुए पाया। पत्नी पर भी करने लगा वार इस दौरान जब राजेन्द्र की पत्नी आशा ने बीच-बचाव किया तो वह उस पर भी कुल्हाड़ी से वार करने लगा। जैसे-तैसे आशा अपने तीन वर्ष के बेटे को लेकर घर से भाग गई। इसके बाद आशा ने इस घटना की जानकारी ग्रामीणों को दी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल ही किरनापुर पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक राजेन्द्र ने भी अपने ही घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पिता पुत्र की मौत मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना में गंभीर रुप से घायल दिपिका को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र किरनापुर में भर्ती कराया। जहां उसकी हालत को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल ही जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। इधर, पंचनामा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पिता-पुत्र का शव पीएम के लिए सीएचसी किरनापुर लाया। वहीं मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया

रविवार, 22 नवंबर 2015

प्रकाशनार्थ

आप सभी पत्रकार बंधु का इसे प्रकाशन में सहयोग चाइए जिससे गावं -गावं निःशक्तजन मे जागरूकता आये और उनका अधिकार मिले प्रकाशनार्थ\
भोपाल ।
विकलांग जनो के हक अधिकार की मांग और सरकारी नीतियों की पोल खोलने के लिए 3 दिसम्बर को दिन में 09 बजे से जंतर मंतर पर विकलांग क्रान्ति दिवस का आयोजन राष्ट्रीय विकलांग अधिकार एवं कर्तव्य मंच द्वारा किया जायेगा जिसमे पूरे देश से काफी संख्या में विकलांग जन एकत्र होंगे । उक्त जानकरी देते हुए मध्यप्रदेश अध्यक्ष श्री रजनीश तिवारी ने बताया की प्रत्येक वर्ष 3 दिसम्बर विष विकलांग दिवस के दिन पुरस्कार और कुछ उपकरण बाँट कर सरकार अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती हैं जब विकलांग जन अपनी मुलभुत आवशयक्ता के लिए परेशान रहते हैं विकलांगजनो के नाम पर करोडो रुपये इधर से उधर होते हैं जिसका 20 प्रतिशत लाभ भी विकलांग जनो को नही मिलता हैं इन मुद्दों के साथ राष्ट्रीय विकलांग आयोग के गठन, विकलांग अधिकार अधिनियम 2014 को पारित किये जाने, पूरे देश में विकलांग जनो के लिए सामान्य नीति बनाने, विशेष शिक्षको को स्थाई करने, विकलांग जनो को योग्यता के अनुसार रोजगार देने, पेंशन 5000 किये जाने जैसी मांगो को भी प्रमुख्यता से उठाया जॉएगा । राष्ट्रीय विकलांग अधिकार एवं कर्तव्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री देवानंद शर्मा "देव" के आह्वान पर पूरे देश की कई संस्थाओ के विकलांग जन सम्मेलन में भाग लेंगे
3 दिसम्बर के विकलांग क्रांति सम्मेलन के लिए हमारी कुछ प्रमुख मांग आप भी सुझाव दें
1-: विकलांग अधिकार अधिनियम 2014 को त्वरित पारित किया जाय
2 -: सशक्त विकलांग आयोग का गठन जिसमे देश में विकलांग हितो के लिए काम कर रहे विकलांग सामाजिक कार्यकर्त्ता को शामिल किया जाये
3-: योग्यता के अनुसार विकलांग जनो के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाय
4-: विकलांगजनो को पंचायत से संसद तक 4 % राजनैतिक आरक्षण दिया जाय
5-: बधिर विकलांग साथियो को वाहन चालन प्रमाण पत्र(Driving license) दिया जाय
6-:पूरे देश के विकलांग जनो के लिए पेंशन हेतु समान नीति बनाई जाय और कम से कम 5000 पेंशन दी जाय
7-: नेत्रहीन साथियो के लिए प्रमुख स्थानों पर ब्रेल लिपि में जानकारी उपलब्ध कराई जाय
8-: विभिन्न समय पर माननीय न्यायालय द्वारा विकलांग हितो के संदर्भ में दिए गए फैसलो को अविलंब लागू कराया जाय
9-: विकलांग जनो को शिक्षित करने वाले विशेष शिक्षक जनो को स्थाई किया जाय और पुरे देश में उनके लिए सामान नीति बनाई जाय
10-: सरकारी अर्धसरकारी भवनों सहित देश के प्रमुख स्थानों को बाधा मुक्त बनाया जाय
11-: विकलांग जनो के लिए टोल टैक्स फ्री किया जाय
12-: विकलांग जनो के लिए बनी योजना में BPL की बाध्यता खत्म की जाय
13-: विकलांग जनो के साथ साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाय
रजनीश तिवारी
सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं
राष्ट्रीय विकलांग अधिकार एवं कर्तव्य मच
(NPDRD) प्रदेश अध्यक्ष
rajnishtiwari104@gmail.com
9826938995

गुरुवार, 12 नवंबर 2015

delhi chalo delhi chalo

मित्रो नमस्कार। जैसा की आप सब को जानकारी हे की 3 दिसम्बर को सरकार द्वारा की जा रही उपेक्षाओ के खिलाफ और अपने अधिकारो की प्राप्ति हेतु प्रस्तावित हल्ला बोल विकलांग क्रन्ति सम्मेलन का आयोजन किया जाना तय हे। सो अब दीवाली निकल चुकी हे।। आप सब से आग्रह हे की ज्यादा से ज्यादा विकलांग जन कार्यक्रम में पहुच सके और आयोजन को सफल बनाया जा सके, सो इसके लिए आप सब अपने अपने स्तर से प्रचार प्रसार करे।। और अपने संपर्क में जो भी विकलांग जन हो सबको कार्यक्रम में आने हेतु जागरूक करे।। आपका- रजनीश तिवारी प्रदेश अध्यक्ष राष्टीय विकलांग अधिकार एवं कर्तव्य मंच मध्यप्रदेश 9826938995rajnishtiwari104@gmail.com

रविवार, 8 नवंबर 2015

Wish Dipawali

पर्व है पुरुषार्थ का, 
दीप के दिव्यार्थ का, 
देहरी पर दीप एक जलता रहे, 
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे, 
हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा, 
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,
दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है,
आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!
झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!

निशक्तजन मोबाइल कोर्ट केवल नाम के लिए

मोबाईल कोर्ट के जरिये अपनी समस्याओं का निराकरण कराने के लिये कोसों दूर से चलकर सतना पहुंचे विकलांगों ने सेमरिया चौराहे पर जाम लगा दिया। बीच सड़क पर बैठे विकलांगों का कहना था कि उन्हें बताया गया था कि शनिवार को टाउन हॉल में निःशक्तजनों की लंबित शिकायतों के निराकरण के लिये मोबाइल कोर्ट लगाई जाएगी। कोर्ट में निःशक्तजन कल्याण आयोग के आयुक्त बलदीप सैनी मौजूद रहेंगे। सामाजिक न्याय विभाग ने निःशक्तों को मोबाइल कोर्ट में आने की सूचना जारी कर दी और के कोने-कोने से तीन सौ के लगभग निःशक्त शनिवार की सुबह सतना पहुंच गये। लेकिन चार घंटे से भी अधिक समय तक इंतजार करने के बाद पता चला कि अधिकारी आज नहीं आ रहे है और मोबाईल कोर्ट स्थगित कर दी गई है। जिससे आक्रोशित विकलांगों ने सड़क पर जाम लगा दिया। जब विभाग ने सूचना देकर विकलांगों को शानिवार के दिन बुला लिया और अचानक मोबाईल कोर्ट स्थगित कर दी गई तो विभाग के अधिकारियों को टाउन हॉल पहुंचकर विकलांगों को इसकी जानकारी भी दी जानी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने ऐसा करना जरूरी नहीं समझा। लिहाजा दोपहर तक अधिकारियों का इंतजार करने के बाद भी सामाजिक न्याय विभाग का कोई अधिकारी मोबाइल कोर्ट के लिये निर्धारित जगह में नहीं आया। तब निःशक्त विकलांगों ने विभाग के कार्यालय में संपर्क किया। जिसमें उन्हें बताया गया कि शनिवार को लगने वाली मोबाइल कोर्ट स्थगित कर दी गई है।भिूखे प्यासे धूप में इंतजार कर रहे निःशक्तजनों को जैसे ही कोर्ट स्थगित होने की जानकारी मिली वो भड़क गए। खुद को छला हुआ महसूस करते हुए सभी विकलांग नाराज होकर शहर के व्यस्ततम सेमरिया चौक में जाम लगा दिया। जिससे करीब आधा घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान विकलांगों ने विभाग पर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। घटना की सूचना मिलने पर विकलांग उप संचालक सामाजिक न्याय विभाग के डॉ. अमर सिंह, कलाकार देवेन्द्र त्रिपाठी मौके पर गये और विकलांगों को समझाने की कोशिश की। लेकिन विकलांगों ने उनकी बातों को मानने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कलेक्टर के आने के बाद ही धरना समाप्त करेंगे।डंडा लेकर पहुंचे एसडीएमजिन्हें कुदरत ने पहले ही मार दिया है उन्हें डराने धमकाने के लिये एसडीएम रमेश सिंह डंडा लेकर सेमरिया चौक पहुंचे। उनके साथ तहसीलदार महेन्द्र पटेल तथा सीएसपी सीताराम यादव के अलावा पुलिसबल भी था। जिन्होंने बहुत ही असभ्य तरीके से विकलांगों को सड़क से हटने के लिये कहा। पहले तो धरने पर बैठे विकलांग अपनी जिद पर अड़े रहे। लेकिन जब उन्हें प्रशासन की ताकत का अंदाजा लगा तो उन्होंने धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद एसडीएम के कहने पर सभी टाउन हॉल वापस पहुंचे। जहां पर एसडीएम ने उनकी समस्याओं को सुना और अगली तिथि में आकर मोबाईल कोर्ट में शामिल होने की समझाईश दी। भोजन और किराए की मांगसेमरिया चौराहा में चकाजाम कर रहे विकलांगों की का गुस्सा इसलिए उबाल मार रहा था कि किराया भाड़ा लगाकर बड़ी मशक्कत के बाद वो सतना पहुंचे। जहां मोबाईल कोर्ट लगाना तो दूर कोई एक गिलास पानी तक के लिये पूछने वाला नहीं था। सुबह से ही सभी विकलांग भूखे प्यासे टाउन हॉल में पड़े रहे और अब उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। एसडीएम से विकलांगों ने कहा कि किसी तरह रूपए पैसे का जुगाड़ करके वो यहां तक आये थे। जिससे उनका रुपए भी पानी में बह गए।मोबाइल कोर्ट स्थगित होने की सूचना सभी जनपद सीईओ, सीएमओ को फोन पर, पत्र द्वारा, मेल से की गई थी। इन लोगों को अपने क्षेत्र के विकलांगों को सूचना देनी चाहिए, मगर नहीं दी गई जिससे विकलांग परेशान हो गये। जिसके जिम्मेदार सीईओ व सीएमओ हैं।डॉ. अमर सिंह, उप संचालक विकलांग सामाजि